ये जायदातों की तकसीम भाइयों में हुयी, के जायदातों में तकसीम हो गए भाई, ये वही इंडो-पाक भाई है जिनका जिक्र शायर अपने ही अंदाज़ में हकीक़त को बयां करते हुए शायरी का रूप दिया इसी तकसीम में प्रदेशों में भी ग़दर कटी जिसमे जम्मू कश्मीर आज भी प्रभावित है इतना की उसकी तस्वीर ही बदल गयी, बुद्धिजीवियों की कलम से लेकर, राजनेताओ के चलन तक घाटी को इतना बदला कि खूबसूरती का रईस कश्मीर कब फकीर हो गया पता ही नहीं चला खूबसूरत लोगो का ये खूबसूरत प्रदेश तब बदसूरत होता जा रहा था जब यहाँ के निवासी जो ऊपर से दिखने वाले सुन्दर लोग अपनी सीरत बदल रहे थे यानी सत्ता की होड़ में भरकस प्रयासरत थे इसी क्रम को बरक़रार रखने के लिए समाज में ऐसे जनमानस विरोधी तत्वों को उतारा जिन्हें आतंकवाद की संज्ञा प्राप्त थी अपनी पहचान व लोगो में दहशत का झंडा लहराने में आतंकवादियों ने कोई कसर न छोड़ी प्रदेश को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी जो आज भी लगान के परोझ रूप में चुकानी पड़ रही है जिसके कारण वर्तमान में प्रदेश को आर्थिक स्तिथि से गुजरना पड़ रहा है कश्मीर ट्रेड के मुताबिक रोज हड़ताल व कर्फ्यू से वर्तमान में $१ मिलियन जो भारतीय मुद्रा में ४५ करोड़ आकी गयी है का नुक्सान हो रहा है
अमन तो मानो कभी यहाँ पैदा ही नहीं हुआ